दर्द दिया है | Dard Diya Hai

- श्रेणी: काव्य / Poetry हिंदी / Hindi
- लेखक: नीरज - Niraj
- पृष्ठ : 178
- साइज: 1 MB
- वर्ष: 1960
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने अपनी रचनाओं और कविताई के दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया है। लेखक के अनुसार, जब कुछ लिखा जाता है तो उसे गद्य कहा जाता है, लेकिन जब लिखने की आवश्यकता महसूस होती है और शब्द अपने आप निकलते हैं, तब वह कविता होती है। लेखक के जीवन में कविता एक अनिवार्यता बन गई है, जो उसे अपने अस्तित्व के लिए आवश्यक लगती है। लेखक ने यह बताया है कि कविता का उद्देश्य जीवन के अनुभवों को व्यक्त करना है, चाहे वे सुख हों या दुख, राग हो या विराग। उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य का उद्देश्य मानवता के सुख-दुख को साझा करना होना चाहिए। लेखक का मानना है कि प्रेम मानव जीवन का सर्वोत्तम संबंध है और यही प्रेम लोगों को एकजुट करता है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि उनके लिए साहित्य का अर्थ केवल व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करना नहीं है, बल्कि यह मानवता के प्रति प्रेम और सहिष्णुता को बढ़ावा देना है। वे इसे अपने काव्य का मूल स्वर मानते हैं। इसके अलावा, लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि कविता की प्रेरणा जीवन के विभिन्न पहलुओं से आती है, जिसमें सामाजिक चेतना और मनुष्य की आंतरिक भूख शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्कृष्ट कविता में हृदय और बुद्धि का संतुलन होता है, लेकिन कविता के माध्यम से हृदय सोचने लगता है और बुद्धि अनुभव करती है। अंत में, लेखक ने यह संदेश दिया है कि सच्ची कविता वही है जो मानवता की गहराईयों को छूती है और प्रेम के माध्यम से जन-जीवन को समृद्ध करती है। उनकी कविताएँ इस दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जिसमें वे जीवन के ताप और वेदना को अपने काव्य में शामिल करते हैं।
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