पिंजरे की उड़ान | Pinjre Ki Udaan

By: यशपाल - Yashpal
पिंजरे की उड़ान | Pinjre Ki Udaan by


दो शब्द :

"पिंजरे की उड़ान" यशपाल द्वारा लिखित एक कथा है, जिसमें लेखक ने अपने जीवन के अनुभवों और संवेदनाओं को साझा किया है। लेखक ने अपने जीवन के छह वर्षों को पिंजरे में बंद रहने की स्थिति में बिताया, जिससे उन्होंने अपने चारों ओर की वास्तविकताओं को कल्पनाओं के माध्यम से जीने की कोशिश की। उनके लिए यह कल्पना एक रचनात्मक प्रक्रिया थी, जिसमें उन्होंने अतीत के सुख-दुख और भविष्य के संभावनाओं की खोज की। कहानी में एक पर्वतीय स्थल का वर्णन है, जहाँ एक प्रसिद्ध कवि का स्वागत किया जा रहा है। वहाँ की सुंदरता, पहाड़ियों, देवदार के पेड़ों और चाँद की रोशनी में सब कुछ अद्भुत दिखाई दे रहा है। कवि का स्वागत करने के लिए लोग उत्सुकता से इकट्ठा हुए हैं। एक युवती, जो कवि के प्रति श्रद्धा रखती है, उसे देखने की चाह में खड़ी होती है। कवि और युवती के बीच संवाद होता है, जहाँ युवती कवि को मार्ग दिखाने का प्रस्ताव देती है। यह संवाद प्रेम और सौंदर्य की खोज में बदल जाता है। कवि ने युवती की सुंदरता की प्रशंसा की और उन्होंने अपने विचार साझा किए कि सौंदर्य का वास्तविक अनुभव उसके उन्मत्त क्षणों में होता है। कवि और युवती समय बिताते हैं, जहाँ कवि प्रकृति की सुंदरता को महसूस करता है और युवती उसकी बातों को ध्यान से सुनती है। यह दृश्य कवि के लिए एक नई ऊँचाई का प्रतीक बन जाता है, जहाँ वह अपने भावनात्मक पिंजरे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। कहानी का अंत इस विचार के साथ होता है कि जीवन में सौंदर्य और प्रेम की खोज में हमें अपने पिंजरे से बाहर निकलकर नए अनुभवों को अपनाना चाहिए। यह कथा हमें जीवन की वास्तविकताओं और कल्पनाओं के बीच संतुलन बनाने की प्रेरणा देती है।


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