भारतीय दर्शन | Bhartiya Darshan

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy भारत / India
- लेखक: सर्वपल्ली राधाकृष्णन - Dr. Sarvpalli Radhakrishnan
- पृष्ठ : 806
- साइज: 65 MB
- वर्ष: 1926
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश भारतीय दर्शन के अध्ययन और उसके विकास के बारे में है। इसमें डॉ. राधाकृष्णन द्वारा भारतीय दर्शन के विभिन्न पहलुओं का विवेचन किया गया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि वेदों और प्राचीन भारतीय विचारधाराओं का गहन अध्ययन आवश्यक है। पाठ में यह भी बताया गया है कि दार्शनिक विचारों की व्याख्या और उनके संदर्भ में विचार करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय विचारधारा के विभिन्न सम्प्रदायों और उनके सिद्धांतों का संक्षिप्त परिचय दिया है, जैसे कि न्याय, सांख्य, योग, मीमांसा, और वेदांत। प्रत्येक दर्शन की विशेषताओं, उनके सिद्धांतों और उनके विकास का उल्लेख करते हुए, वे यह भी बताते हैं कि भारतीय दर्शन का अध्ययन एक जटिल कार्य है और इसके लिए गहन ज्ञान और समय की आवश्यकता होती है। राधाकृष्णन ने यह भी स्वीकार किया है कि उनकी पुस्तक में पूर्णता का दावा नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रत्येक विषय की गहराई में जाने के लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता होती है। उन्होंने अपने कार्य में प्रदत्त जानकारी को बिना किसी पूर्वाग्रह के प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। इस पाठ में भारतीय दर्शन की समृद्ध परंपरा, उसके प्रमुख विचारक और उनके योगदान का महत्व बताया गया है, और यह स्पष्ट किया गया है कि यह केवल एक ऐतिहासिक अध्ययन नहीं है, बल्कि विचारों और सिद्धांतों का एक जीवंत संवाद है जो आज भी प्रासंगिक है।
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