ग्राह्य मंत्र और उनका विनियोग | Graahya Mantra Aur Unka Viniyog

By: डॉ. कृष्णलाल - Dr.Krishan Lal
ग्राह्य मंत्र और उनका विनियोग | Graahya Mantra Aur Unka Viniyog by


दो शब्द :

इस पाठ में डॉ. कृष्णलाल द्वारा रचित ग्रंथ "गृह्मन्त्र और उनका विनियोग" का महत्व और इसकी विशेषताएँ बताई गई हैं। लेखक ने लगभग चौदह वर्षों के शोध और अध्ययन के बाद गृह्मन्त्रों से संबंधित जटिल समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया है, जो वैदिक साहित्य और गृह्य कर्मों में मन्त्रों के विनियोग का गहन विश्लेषण करता है। पुस्तक में विभिन्न गृह्य कर्मों के लिए मन्त्रों का चयन कैसे किया गया है, इस पर चर्चा की गई है। यह स्पष्ट किया गया है कि गृह्य और श्रौत कर्मों में मन्त्रों का उपयोग केवल आस्था पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहन मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण भी है। लेखक ने यह भी बताया है कि विभिन्न ग्रंथों से उद्धृत मन्त्रों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है और इस प्रकार मन्त्रों के पाठान्तरों का विवेचन किया गया है। ग्रंथ में लगभग 1100 मन्त्रों का विविध दृष्टियों से अध्ययन किया गया है, जो वैदिक साहित्य के अध्ययन में सहायक साबित होगा। डॉ. कृष्णलाल ने इस ग्रंथ के माध्यम से प्राचीन भारतीय संस्कृति के विकास को भी उजागर किया है। इस प्रकार, यह ग्रंथ न केवल वैदिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और धर्म परंपरा को समझने के लिए भी उपयोगी है। लेखक ने अपने शोध के दौरान जिन विद्वानों और ग्रंथों से मार्गदर्शन प्राप्त किया है, उनके प्रति आभार प्रकट किया है, और अंत में पाठकों से सुझाव मांगे हैं कि वे पुस्तक के दोषों को इंगित करें।


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