भविष्य पुराण की भाषा | Bhavishya Puran Ki Bhasha

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy संस्कृत /sanskrit
- लेखक: पण्डित दुर्गाप्रसाद - Pandit Durgaprasad
- पृष्ठ : 683
- साइज: 95 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में भविष्यपुराण की भूमिका का वर्णन किया गया है। धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष को चार प्रमुख तत्व बताया गया है, जिनमें धर्म को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। धर्म का पालन करके मनुष्य अन्य तीनों तत्वों को प्राप्त कर सकता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि वेदों के अध्ययन और वैदिक कर्मों के अनुसार धर्म की प्राप्ति होती है। लेकिन कलियुग में मनुष्य की आयु कम होने और बुद्धि के मंद होने के कारण वेदों का अध्ययन कठिन हो गया है। इसलिए, श्रीवेदव्यासजी ने वेदों के चार भाग किए और अठारह पुराणों तथा महाभारत की रचना की, ताकि सरलता से धर्म का ज्ञान प्राप्त हो सके। भविष्यपुराण का अनुवाद करने का प्रयास किया गया है, ताकि आर्यजन इसे अपनी भाषा में समझ सकें और अपने धर्म का सही ज्ञान प्राप्त कर सकें। अनुवादक ने पाठ को सावधानीपूर्वक किया है, ताकि पाठक केवल गुणों को ग्रहण करें और दोषों पर ध्यान न दें। पाठ के अंत में अनुवादक ने अपनी मेहनत और योगदान का विवरण दिया है।
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