भजन संग्रह | Bhajan Sangrah

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता भक्ति/ bhakti
- लेखक: वियोगी हरि - Viyogi Hari
- पृष्ठ : 196
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1516
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दो शब्द :
इस पाठ में भजन संग्रह का एक महत्वपूर्ण भाग प्रस्तुत किया गया है, जिसमें भक्तों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की महिमा और प्रेम को दर्शाने वाले भजन शामिल हैं। भजन संग्रह को दो भागों में बांटा गया है। पहले भाग में ब्रज के महात्माओं द्वारा लिखे गए भजन हैं, जिनमें सूरदास, हितहरिवंश, स्वामी हरिदास, और अन्य भक्तों के पद शामिल हैं। इन भजनों में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरा प्रेम और भक्ति का अनुभव स्पष्ट रूप से प्रकट होता है। दूसरे भाग में संतों के पदों का संक्षिप्त संग्रह किया गया है, जिसमें संत नानक, दादू, रैदास, और मलूकदास जैसी विभूतियों द्वारा रचित भजन शामिल हैं। ये भजन साधना, भक्ति, और प्रेम के गहरे भावों को व्यक्त करते हैं। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन भजनों का पाठ करने से हृदय को शांति और आनंद मिलता है, और भक्तों के मन में भगवान के प्रति अनन्य प्रेम जगा रहता है। लेखक वियोगी हरि ने इस संग्रह के माध्यम से पाठकों से प्रार्थना की है कि वे इन भजनों के प्रेम-रस में डूब जाएं और भक्ति के पथ पर आगे बढ़ें। अंत में, पाठ में प्रकट की गई भावना यह है कि भगवान का प्रेम और भक्ति सभी के जीवन को संपूर्णता और आनंद से भर देगी।
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