थे नायसूत्रास ऑफ़ गौतम | The Nyayasutras of Gautam

By: महर्षि वात्स्यायन - Maharishi Vatsyayana
थे नायसूत्रास ऑफ़ गौतम  | The Nyayasutras of Gautam by


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय दार्शनिक परंपरा और उसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। इसमें आस्तिक और नास्तिक दृष्टिकोणों के बीच के मतभेदों को स्पष्ट किया गया है। नास्तिकता के संदर्भ में, यह बताया गया है कि कुछ लोग वेदों के अंशों पर आपत्ति करते हैं और उन्हें नास्तिक माना जाता है। पाठ में आस्तिक दार्शनिकों के छह प्रमुख वर्गों का उल्लेख किया गया है, जैसे न्याय, वैशेषिक, सांख्य, और वेदांत आदि। इसके अलावा, पाठ में दार्शनिक ग्रंथों के महत्व और उनके प्रमाणों पर भी चर्चा की गई है। यह बताया गया है कि दर्शन शास्त्र उन सत्यों की खोज करता है जिन्हें प्रमाणित करना आवश्यक है और ये सत्य किस प्रकार से विभिन्न आचार्यों की व्याख्याओं के माध्यम से स्थापित होते हैं। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि आस्तिक दार्शनिकों ने अपने विचारों को वेदों से जोड़ा है और उनके मतों के बीच के विरोधाभासों का विश्लेषण किया गया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि इन दार्शनिक विचारों का उद्देश्य सत्य की खोज करना और मनुष्य के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाना है। अंत में, विभिन्न आस्तिक दर्शन के प्रमुख सिद्धांतों और उनके आपसी संबंधों का उल्लेख किया गया है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि कैसे ये दर्शन एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं और ज्ञान के क्षेत्र में योगदान करते हैं।


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