आराधना | Aradhana

By: शंकर अभ्यंकर - Shankar Abhaynkar
आराधना | Aradhana by


दो शब्द :

'आराबथना' शंकर कृ. अभ्यंकर द्वारा रचित एक संगीत संबंधी ग्रंथ है, जिसमें उनकी बंदिशों का संग्रह किया गया है। लेखक ने अपनी रचनाओं में 'ख्याल' शैली का अनुसरण किया है, जिसमें विभिन्न रागों के लिए ख्याल और तराने शामिल हैं। पुस्तक की प्रस्तावना में संगीतज्ञ के. जी. गिंडे ने अभ्यंकर की रचनाओं की सराहना की है और बताया है कि कैसे एक राग में विभिन्न बंदिशों का होना उसके विकास में सहायक होता है। लेखक का मानना है कि बंदिशों में स्वर और शब्दों का संतुलन होना आवश्यक है, और साहित्य का गेय होना भी जरूरी है। इसके अलावा, उन्होंने रागों की नई रचनाओं का महत्व भी बताया है। अभ्यंकर ने सितार वादन में भी महारत हासिल की है और उनके गायक आदर्श पं. कुमार गंधर्व रहे हैं। अभ्यंकर ने अपनी रचनाओं में पारंपरिक साहित्य का उपयोग किया है, जिससे उनकी बंदिशें समझने में सरल होती हैं। गिंडे ने सुझाव दिया कि इन बंदिशों को ध्वनि रूप में उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि संगीत प्रेमी उन्हें सही तरीके से सीख सकें। अंत में, अभ्यंकर ने अपने सहयोगियों और शिक्षकों को धन्यवाद दिया है और आशा व्यक्त की है कि उनकी रचनाएं संगीत प्रेमियों को आनंदित करेंगी। पुस्तक में विभिन्न रागों की बंदिशें शामिल हैं, जो संगीत की आराधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।


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