अकाल और उसके बाद | Akaal Aur Uske Baad

By: नागार्जुन - Nagaarjun पुस्तक समूह - Pustak Samuh
अकाल और उसके बाद  | Akaal Aur Uske Baad by


दो शब्द :

इस पाठ में एक समय की बात की गई है जब चूल्हा उदास था और मिल भी दुखी थी। लिज़ार्ड्स दीवार पर डरते हुए दौड़ते थे और चूहों को भी बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। सभी जीव-जंतु और जीवित प्राणी संकट में थे। लेकिन लंबे समय बाद, अनाज फिर से घरों में वापस आया और पूरे घर की आँखें चमकने लगीं। यह एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है, जिसमें कठिनाइयों के बाद खुशियाँ लौट आई हैं।


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