वाल्मीकि रामायणमे | Valmiki Ramayan

By: जीवानंद विद्यासागर - Jivaananda Vidyasaagara


दो शब्द :

इस पाठ में रामायण के बालकाण्ड का एक अंश प्रस्तुत किया गया है, जिसमें राम, लक्ष्मण, और विश्वामित्र का संवाद और उनकी गतिविधियाँ वर्णित हैं। राम, जो कि रघुकुल के एक महान योद्धा हैं, अपने पिता दशरथ के आदेश का पालन करते हुए अपने गुरु विश्वामित्र के साथ वन में जाते हैं। पाठ में यह दिखाया गया है कि राम ने ताटका नामक राक्षसी का वध करने का संकल्प लिया है, जो कि वन में आतंक फैला रही थी। विश्वामित्र राम को ताटका के बारे में बताते हैं और उसे मारने के लिए प्रेरित करते हैं। राम अपनी शक्ति और साहस का प्रदर्शन करते हैं और ताटका से लड़ाई करते हैं। ताटका की शक्तियों का वर्णन भी पाठ में किया गया है, जिसमें उसकी मायावी शक्तियाँ और रूप बदलने की क्षमताएँ शामिल हैं। राम की वीरता और निष्ठा को दर्शाते हुए, पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि राम ने ताटका को पराजित किया और उसके वध के बाद वे विश्वामित्र के साथ आगे बढ़ते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि राम केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि एक धर्मात्मा भी हैं जो अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। इस प्रकार, इस अंश ने राम के चरित्र की महत्ता, उनके साहस और धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को उजागर किया है। पाठ में न केवल कथा का विकास है, बल्कि यह राम के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को भी दर्शाता है।


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