विजयनगर साम्राज्य का इतिहास | Vijayanagar Samrajya Ka Itihas

- श्रेणी: इतिहास / History भारत / India
- लेखक: डॉ. रामप्रसादत्रिपाठी - Dr. Ramprasad Tripathi
- पृष्ठ : 318
- साइज: 11 MB
- वर्ष: 1944
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दो शब्द :
विजयनगर साम्राज्य का इतिहास एक महत्वपूर्ण विषय है, जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह साम्राज्य दक्षिण भारत में स्थापित हुआ और हिन्दू संस्कृति की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से विजयनगर साम्राज्य के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का विवेचन किया है। इतिहास में यह देखा गया है कि जब-जब भारत में अन्य साम्राज्य स्थापित हुए, तब वे अपनी समृद्धि के साथ-साथ अंततः काल के गाल में विलीन हो गए। विजयनगर साम्राज्य का अस्तित्व 1336 से 1564 तक रहा और इसने हिन्दू संस्कृति को न केवल संरक्षित किया, बल्कि उसका विकास भी किया। यह साम्राज्य मुसलमान आक्रमणकारियों के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनकर खड़ा हुआ और दक्षिण भारत में हिन्दू संस्कृति की रक्षा की। इस पुस्तक में लेखक ने विजयनगर साम्राज्य के राजाओं की उपलब्धियों और उनके योगदान को उजागर किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे इस साम्राज्य ने न केवल सैन्य दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी हिन्दू धर्म और संस्कृति को मजबूत आधार दिया। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि इस विषय पर हिन्दी में कोई प्रामाणिक पुस्तक नहीं थी और यह ग्रंथ इस कमी को पूरा करने का प्रयास है। विजयनगर साम्राज्य की कला, साहित्य, धार्मिकता और सामाजिक जीवन की विशेषताओं को भी पुस्तक में वर्णित किया गया है। यह पुस्तक इतिहास के प्रति गहरी रुचि रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण सामग्री प्रस्तुत करती है, जो कि भारतीय संस्कृति की महानता को समझने में मदद करेगी। लेखक ने इस ग्रंथ को लिखने में जिन लोगों का सहयोग प्राप्त किया है, उनके प्रति आभार प्रकट किया है और यह बताया है कि इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को विजयनगर साम्राज्य के गौरव और इसकी सांस्कृतिक धरोहर से अवगत कराना है। समग्र रूप से, यह पुस्तक विजयनगर साम्राज्य के इतिहास को हिन्दी पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान देती है।
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