अनुवाद चन्द्रिका | Anuvaad Chandrika

- श्रेणी: Grammar/व्याकरण भाषा / Language साहित्य / Literature
- लेखक: चक्रधर शर्मा शास्त्री - Chakradhar Sharma Shastri
- पृष्ठ : 322
- साइज: 35 MB
- वर्ष: 1954
-
-
Share Now:
दो शब्द :
पाठ "अनुवादचन्दिका" का उद्देश्य संस्कृत भाषा के अध्ययन को सरल बनाना है। प्रणेता श्रीचक्रधरशर्मा शास्त्री ने संस्कृत के व्याकरण को समझने में आने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इसे लिखा है। पाठ में विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है, जैसे धातुओं के रूप, विभक्तियाँ, कारक, वाक्य रचना आदि। संस्कृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए, यह बताया गया है कि यह भारतीय संस्कृति की जड़ है और अन्य भाषाओं की जननी है। पाठ में वाक्य रचना, ध्वनियों के भेद, स्वर और व्यंजन के उच्चारण, तथा वर्णों की विशेषताएँ भी वर्णित की गई हैं। विशेष रूप से, अनुवाद की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है, जिसमें एक भाषा के शब्दों का अर्थ दूसरी भाषा में बदलना शामिल है। अध्याय में विभक्तियों, कारकों और उनके उपयोग का विस्तार से विवरण दिया गया है। जैसे, प्रथमा विभक्ति (कर्ता), द्वितीया विभक्ति (कर्म), तृतीया विभक्ति (करण) आदि का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, शब्दों के विकार और अविकार का भी वर्णन किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ शब्दों के रूप स्थायी रहते हैं, जबकि अन्य में परिवर्तन होता है। कुल मिलाकर, यह पाठ संस्कृत भाषा के व्याकरण को सरल और सुबोध तरीके से प्रस्तुत करता है, ताकि छात्र इसे आसानी से समझ सकें और इसका अध्ययन कर सकें।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.