हम्मीर महाकाव्य | Hammir Mahakavya

By: ताऊ शेखावटी - Tau Shekhawati
हम्मीर महाकाव्य | Hammir Mahakavya by


दो शब्द :

हम्मीर महाकाव्य का मुख्य विषय राव हम्मीरदेव चौहाण की वीरता और उनके क्षत्रिय गुणों को चित्रित करना है। राव हम्मीरदेव ने एक मुसलमान सरदार मुहम्मद शाह को शरण देकर अपने प्राणों की परवाह न करते हुए दिल्ली के सुलतान अलाउद्दीन खिलजी के कोप का सामना किया। यह घटना 13वीं शताब्दी की है और यह भारतीय इतिहास में हमीरी-हठ के नाम से जानी जाती है। कविवर ताऊ शेखावाटी द्वारा रचित यह महाकाव्य 1431 छंदों में है और यह राव हम्मीरदेव के चरित्र को उजागर करते हुए उनकी वीरता का गुणगान करता है। महाकाव्य में कई पात्रों का उल्लेख है, जैसे कि उनकी पत्नी, राजमाता, और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति। यह काव्य न केवल ऐतिहासिक तथ्य प्रस्तुत करता है, बल्कि भारतीय संस्कृति और वीरता के प्रतीक के रूप में भी महत्वपूर्ण है। कवि ने इस काव्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की समृद्धि और वीरता को प्रकट किया है। यह काव्य साहित्य, कला, और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पाठकों को प्रेरित करता है। ताऊ शेखावाटी की यह रचना न केवल महाकाव्य लेखन की परंपरा को समृद्ध करती है, बल्कि पाठकों को एक समग्र अनुभव प्रदान करती है। महाकाव्य का उद्देश्य राव हम्मीरदेव की वीरता और त्याग को अमर बनाना है, और यह दर्शाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने सिद्धांतों के प्रति अडिग रह सकता है। इस काव्य के माध्यम से कवि ने न केवल राव हम्मीरदेव के चरित्र को जीवंत किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि भारतीय संस्कृति में वीरता और धर्म का कितना महत्व है।


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