कृष्णायन | Krishnayan

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता भारत / India
- लेखक: धीरेन्द्र वर्मा - Dheerendra Verma
- पृष्ठ : 939
- साइज: 12 MB
- वर्ष: 1918
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दो शब्द :
इस पाठ में 'कृष्णायन' नामक ग्रंथ का सारांश प्रस्तुत किया गया है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और चरित्र का विस्तृत वर्णन है। लेखक ने यह उल्लेख किया है कि भारतीय साहित्य में भगवान राम और भगवान कृष्ण के चरित्रों पर विशेष चर्चा होती है। भगवान राम को आदर्श गृहस्थ जीवन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जबकि भगवान कृष्ण का चरित्र विभिन्न रंगों और गुणों से भरा हुआ है। श्रीराम का जीवन आदर्शों से भरा है, जिसमें प्रेम, सत्य, और शौर्य के गुण हैं, जिससे लोगों ने प्रेरणा ली है। दूसरी ओर, श्रीकृष्ण का चरित्र जटिलताओं से भरा है, जिसमें उन्होंने बचपन में गोपियों के प्रति प्रेम और युद्ध में असुरों से लड़ने की शक्ति का परिचय दिया। उन्होंने गीता में ज्ञान प्रदान किया और समय-समय पर अपनी चातुर्य और बुद्धिमता का प्रदर्शन किया। लेखक ने यह भी बताया है कि श्रीकृष्ण के जीवन के बारे में कई ग्रंथ हैं, लेकिन 'कृष्णायन' में उनका समग्र चरित्र चित्रित किया गया है। इसमें विभिन्न घटनाओं और परिप्रेक्ष्यों का वर्णन है, जो कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं। इस ग्रंथ में भाषा सरल और मधुर है, और इसमें संस्कृत के शब्दों का प्रयोग किया गया है। लेखक ने आशा व्यक्त की है कि यह ग्रंथ 'रामचरित मानस' की भांति लोगों के बीच लोकप्रिय होगा। 'कृष्णायन' में भगवान कृष्ण के जीवन की गहराई और उनके अद्वितीय गुणों का चित्रण किया गया है, जिससे पाठक उनके चरित्र को और अधिक समझ सकें। इस प्रकार, 'कृष्णायन' एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो न केवल भगवान कृष्ण के चरित्र का वर्णन करता है, बल्कि भारतीय साहित्य में उनके स्थान को भी स्पष्ट करता है।
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