ज्योतिस्सार अथवा ज्योतिपरत्न | Jyotissar Athava Jyotiratna
- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता ज्योतिष / Astrology
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 232
- साइज: 6 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया गया है। इसमें शक, संवत्सर, ऋतु, नक्षत्र, योग, और अन्य ज्योतिषीय तत्वों की जानकारी दी गई है। पाठ में संक्रांति, तिथि, वार, और नक्षत्रों का महत्व बताया गया है, साथ ही विभिन्न प्रकार के योग, करण, और उनके फल का उल्लेख किया गया है। ज्योतिष के अनुसार, प्रत्येक नक्षत्र और तिथि का विवाह, उपनयन जैसी महत्वपूर्ण संस्कारों पर प्रभाव होता है। इसमें विवाह के लिए शुभ नक्षत्रों का चयन और दुष्ट ग्रहों के प्रभाव से बचने के उपाय भी बताए गए हैं। सारांश में यह भी शामिल है कि कैसे विभिन्न ग्रहों की स्थिति और उनके संबंध विवाह और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर शुभ या अशुभ परिणाम दे सकते हैं। पाठ में विभिन्न ज्योतिषीय नियमों और सिद्धांतों का समावेश किया गया है, जो व्यक्ति के जीवन में उनके कार्यों और निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं। इस प्रकार, यह पाठ ज्योतिष के एक व्यापक दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है, जिसमें विभिन्न तत्वों का विस्तृत विवरण है, जो कि व्यक्ति की जीवनशैली और निर्णय लेने में सहायक हो सकता है।
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