मंत्र विज्ञानं | Mantra Vigyan

By: अज्ञात - Unknown


दो शब्द :

यह पाठ मंत्र और नादब्रह्म के महत्व पर केंद्रित है। लेखक ने बताया है कि मंत्र केवल एक साधारण शब्द नहीं है, बल्कि यह ब्रह्म के साथ जुड़ा हुआ एक गहरा रहस्य है। लेखक का तर्क है कि मंत्र का सही उपयोग करने से न केवल व्यक्ति अपनी समस्याओं का समाधान कर सकता है, बल्कि निर्वाण प्राप्ति भी कर सकता है। पुस्तक में भौतिक विज्ञान और आध्यात्मिक विज्ञान के बीच के संबंध को भी स्पष्ट किया गया है। लेखक ने यह सुझाव दिया है कि वर्तमान में मनुष्य ने भौतिकता की ओर ध्यान केंद्रित किया है, जिसके चलते वह अपनी आंतरिक शांति और संतुलन खो रहा है। वह भौतिक सुख-सुविधाओं की खोज में बाहर की ओर भाग रहा है, जबकि वास्तविक सुख उसके भीतर है। लेखक का मानना है कि प्राचीन भारतीय ऋषियों ने जो ज्ञान और विज्ञान का मार्ग खोजा था, वह आंतरिक और सूक्ष्म था। इस ज्ञान ने समाज को सुरक्षा और कल्याण प्रदान किया। आज की आधुनिकता ने हमें बाहरी सुख दिए हैं, लेकिन यह भी कहा गया है कि ये सुख अस्थायी हैं और व्यक्ति के भीतर की शांति को नहीं छूते। अंत में, लेखक पाठकों से आग्रह करते हैं कि वे मंत्रों का उपयोग ध्यानपूर्वक करें और इसके चमत्कारों का अनुभव करें। यह पुस्तक उन सभी के लिए उपयोगी है जो अपने जीवन में संतुलन और शांति की खोज कर रहे हैं।


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