बाल भारती भाग-३ | Bal Bharti Bhag-3

By: सत्येन्द्र - Satyendra संयुक्ता लुदरा - Sanyukta Ludra
बाल भारती भाग-३ | Bal Bharti Bhag-3 by


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश यह है कि भाषा मनुष्य के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। भाषा सीखना एक आवश्यक प्रक्रिया है, जो व्यक्ति के सामाजिक और बौद्धिक विकास में योगदान करती है। शिक्षा के माध्यम से भाषा का प्रवाह निरंतर बना रहता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के तहत, भाषा शिक्षण को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम और पाठ्य सामग्री का निर्माण एक सतत प्रक्रिया है। बाल भारती भाग 3 पुस्तक, जो प्राथमिक कक्षाओं में मातृभाषा हिंदी पढ़ाने के लिए है, का निर्माण इसी दिशा में किया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य है कि बच्चों को भाषा के प्रवाह में सक्षम बनाना, बस्ते के बोझ को कम करना और मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करना। पुस्तक में भाषा-कौशलों के साथ-साथ बच्चों में पठन-पाठन के प्रति रुचि उत्पन्न करने का प्रयास किया गया है। इसमें विभिन्न साहित्यिक विधाओं जैसे कहानी, कविता, निबंध आदि के माध्यम से सामग्री प्रस्तुत की गई है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि विद्यार्थियों के मानसिक विकास के साथ-साथ मानव मूल्यों का भी विकास हो। शिक्षकों के लिए यह आवश्यक है कि वे बच्चों के साथ संवाद स्थापित करें और उन्हें भाषा के प्रति उत्साहित करें। पाठ्यक्रम के दौरान बच्चों को सक्रिय रूप से भागीदारी के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि उनकी भाषा संबंधी योग्यताओं में वृद्धि हो सके। इस प्रकार, भाषा शिक्षण एक समग्र प्रक्रिया है जो बच्चों के संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


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