कंब रामायण | Kamba Ramayan

By: न. वी. राजगोपाल - N. V. Rajgopal
कंब रामायण | Kamba Ramayan by


दो शब्द :

यह पाठ "कब रामायण" पर आधारित है, जो तमिल साहित्य का एक महत्वपूर्ण महाकाव्य है। इसका रचनाकाल लगभग 800 से 1100 वर्ष पुराना माना जाता है और यह वाल्मीकि की रामायण का अनुकरण करता है, लेकिन इसमें दक्षिण भारतीय संस्कृति के तत्वों का समावेश है। इस ग्रंथ के अनुवाद का उद्देश्य हिंदी भाषी जनता को तमिल साहित्य और उसकी समृद्ध संस्कृति से परिचित कराना है। बिहार राष्ट्रभाषा परिषद ने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में मौजूद रामायणों के हिंदी अनुवाद का कार्य आरंभ किया। परिषद ने "कब रामायण" के हिंदी अनुवाद को प्राथमिकता दी और इसके लिए एक योग्य अनुवादक की खोज की। अनुवादक श्री न. वी. राजगोपालन को चुना गया, जो तमिल और हिंदी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं। यह ग्रंथ दस हजार श्लोकों में विभाजित है और इसे दो भागों में प्रकाशित किया जाएगा। पहले भाग में बालकांड से लेकर किष्किंधाकांड तक का समावेश होगा। यह महाकाव्य अपने काव्य सौष्ठव के लिए प्रसिद्ध है और इसकी रचना भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता को दर्शाती है। इस प्रकार, "कब रामायण" का अनुवाद हिंदी में किया जाना एक महत्वपूर्ण कार्य है, जो भारतीय साहित्य की समृद्धि को बढ़ाने और विभिन्न भाषाओं के बीच पुल बनाने का प्रयास है।


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