भारतीय दर्शनशास्त्र का इतिहास | Bhartiya Darshanshastra Ka Itihas

- श्रेणी: इतिहास / History दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy भारत / India
- लेखक: देवराज - Devraj
- पृष्ठ : 531
- साइज: 49 MB
- वर्ष: 1950
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश भारतीय दर्शनशास्त्र के इतिहास पर आधारित है, जिसे लेखक ने विस्तार से प्रस्तुत किया है। लेखक ने दर्शन के महत्व और इसकी आवश्यकता पर विचार किया है। उन्होंने यह बताया है कि मनुष्य की प्रकृति केवल भौतिक आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विचारशील प्राणी है जो अपने जीवन के गहरे प्रश्नों पर चिंतन करता है। पुस्तक में दर्शनशास्त्र के विकास, विभिन्न दार्शनिक धाराओं, और उनके योगदान का विश्लेषण किया गया है। लेखक ने बौद्ध, जैन, और अन्य भारतीय दार्शनिक विचारों का उल्लेख किया है, साथ ही रामानुज से लेकर आधुनिक युग तक के दार्शनिकों के विचारों का भी समावेश किया है। पुस्तक के दूसरे संस्करण में पहले संस्करण के मुकाबले अधिक संशोधन और परिवर्धन किए गए हैं। लेखक ने अपने मित्र डॉ. रामानंद तिवारी के सहयोग का भी उल्लेख किया है, जिन्होंने पुस्तक को सुधारने में मदद की। इस संस्करण में बौद्ध और जैन दार्शनिकों पर विशेष ध्यान दिया गया है और विभिन्न दार्शनिक धाराओं का विस्तृत परिचय दिया गया है। लेखक ने यह भी स्वीकार किया है कि अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए नए विचारों और परंपराओं का निर्माण आवश्यक है। कुल मिलाकर, यह पुस्तक भारतीय दर्शन का एक समृद्ध और विस्तृत इतिहास प्रस्तुत करती है, जो पाठकों को दर्शनशास्त्र के विभिन्न पहलुओं और उसके विकास की प्रक्रिया से अवगत कराती है।
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