सुलभ कृषि -शास्त्र | Sulabh Krishi-Shastra

- श्रेणी: Agriculture and Environment | कृषि और पर्यावरण विज्ञान / Science
- लेखक: सुखसम्पत्तिराय भंडारी - Sukhasampattiray Bhandari
- पृष्ठ : 418
- साइज: 9 MB
-
-
Share Now:
दो शब्द :
भारत एक कृषि-प्रधान देश है, जहाँ की पैदावार न केवल अपने देश, बल्कि कई अन्य देशों की जीवनधारा के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ लगभग 73% किसान हैं, जो देश की विशेष शक्ति हैं। किसान की उन्नति के बिना देश की वास्तविक उन्नति संभव नहीं है। इसीलिए, किसानों के उद्धार के लिए हमें ठोस और विवेकपूर्ण कार्य करने की आवश्यकता है। "कृषि-अर्थमाला" का आयोजन इस दिशा में एक प्रयास है। किसानों की सेवा और उन्नति के उद्देश्य से, यह ग्रंथ किसानों को दरिद्रता से उबारने, ज्ञान का प्रकाश फैलाने, और उनके जीवन को सुखमय बनाने का प्रयास करता है। किसानों की उन्नति के लिए विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है, जिसमें भावनाओं के साथ-साथ व्यावहारिकता का संतुलन महत्वपूर्ण है। कृषि के क्षेत्र में सफल होने के लिए दूरदर्शिता, परिणाम-दर्शिता, और समय की पहचान जरूरी है। भारत की वर्तमान स्थिति को सुधारने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है, जो देश को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा सकें। इसी सोच के तहत "कृषि ग्रंथमाला" की शुरुआत की जा रही है, जिसमें "सुलभ कृषि-शास्त्र" को पहला ग्रंथ बनाया गया है। इस ग्रंथ में किसानों के लिए उपयोगी जानकारी दी गई है, जिसमें भूमि की किस्में, खाद, फसल की जुताई, बीज का चुनाव, और फसलों की सुरक्षा के उपाय शामिल हैं। यह ग्रंथ सरल भाषा में लिखा गया है, ताकि सभी किसान इससे लाभ उठा सकें। लेखक ने विभिन्न कृषि विशेषज्ञों के विचारों को भी शामिल किया है और अपने अनुभवों के आधार पर उपयोगी सुझाव दिए हैं। किसानों के लिए यह ग्रंथ न केवल ज्ञान का स्रोत है, बल्कि उन्हें अपनी स्थिति सुधारने में भी सहायता करेगा। यदि इससे पाठकों को लाभ होता है, तो लेखक अपनी मेहनत को सफल मानेंगे।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.