न्यायसूत्र और न्याय-भाष्य | Nyaya Sutra aur Nyaya-Bhashya

By: पं राजाराम - Pt. Rajaram Profesar
न्यायसूत्र और न्याय-भाष्य | Nyaya Sutra aur Nyaya-Bhashya by


दो शब्द :

यह पाठ विभिन्न ज्ञान, प्रमाण, और तत्त्वज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें प्रमाण के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया गया है, जैसे प्रत्यक्ष, अनुमान, और उपमान, और उनके उपयोग का विवरण प्रस्तुत किया गया है। पाठ में यह भी बताया गया है कि प्रमाण कैसे ज्ञान की प्राप्ति में सहायक होते हैं और किस प्रकार से वस्तुओं का यथार्थ ज्ञान कराने में उनकी भूमिका होती है। प्रमाणों का वर्गीकरण और उनके विशेषताओं का उल्लेख किया गया है, जिसमें प्रत्यक्ष प्रमाण का महत्व, अनुमान के विभिन्न प्रकार, और उपमान की व्याख्या शामिल है। पाठ में आत्मा, इंद्रियों, और अन्य भौतिक तत्वों के निरूपण पर भी चर्चा की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ज्ञान की प्राप्ति के लिए तर्क और प्रमाण का उपयोग आवश्यक है। इसके अलावा, पाठ में मोक्ष प्राप्ति के साधनों और विभिन्न दोषों तथा उनके निरूपण का भी उल्लेख है। यह सभी तत्व मिलकर तत्त्वज्ञान और न्याय शास्त्र के गहरे ज्ञान को व्यक्त करते हैं, जिससे पाठक को तर्क और प्रमाण की महत्ता समझ में आती है। समग्रतः, यह पाठ ज्ञान, तत्त्व और प्रमाण के सिद्धांतों पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है तथा इन तत्वों के माध्यम से सत्य और वास्तविकता के प्रति एक गहरी समझ विकसित करने का प्रयास करता है।


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