मानव-शरीर-रहस्य | Manav Sharir Rahasya

- श्रेणी: Health and Wellness | स्वास्थ्य विज्ञान / Science
- लेखक: प्रेमचंद - Premchand मुकुंद स्वरुप वर्मा - Mukund Swarup Verma
- पृष्ठ : 396
- साइज: 29 MB
- वर्ष: 1951
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दो शब्द :
इस पाठ में मानव शरीर की त्वचा और उसके रहस्यों का विस्तृत वर्णन किया गया है। त्वचा को बाहरी प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए उसकी संरचना इस प्रकार बनाई गई है कि यह कठिन और सहनशील होती है। त्वचा के ऊपरी भाग को उपचर्म कहा जाता है, जो कई परतों में विभाजित होता है। इस परत में से कोशिकाएं एक-दूसरे के निकट स्थित होती हैं, जिससे यह कठोरता और सुरक्षा प्रदान करती है। त्वचा के नीचे का भाग नर्म और संवेदनशील होता है, जिसमें रक्त वाहिकाएं और नसें होती हैं। ये नसें त्वचा के माध्यम से मस्तिष्क को संकेत भेजती हैं, जिससे हमें विभिन्न संवेदनाएं जैसे दर्द, तापमान आदि का अनुभव होता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि त्वचा की ऊपरी परत में कोशिकाएं समय-समय पर मरती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं ले लेती हैं। इसके अतिरिक्त, पाठ में बालों और नाखूनों की संरचना का भी उल्लेख किया गया है। बाल और नाखून भी त्वचा की कोशिकाओं से बने होते हैं और इनमें एक विशेष रचना होती है। बालों का रंग और उनकी अवस्था भी समय के साथ बदलती है, जैसे वृद्धावस्था में बाल सफेद हो जाते हैं। इस प्रकार, यह पाठ मानव शरीर की त्वचा, उसके कार्य, संरचना और अन्य संबंधित तत्वों के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जो शरीर की रक्षा और संवेदनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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