मेरी जीवन यात्रा | Meri Jeevan Yatra

- श्रेणी: जीवनी / Biography
- लेखक: राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan
- पृष्ठ : 570
- साइज: 49 MB
- वर्ष: 1946
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक राहुल सांकृत्यायन ने अपनी जीवन-यात्रा के बारे में लिखा है, जिसमें उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन, परिवार और बचपन की कुछ यादों का वर्णन किया है। उनका जन्म 1863 में हुआ था और उन्होंने अपनी माँ, पिता और नाना-नानी के बारे में विस्तार से बताया है। उनकी माँ, कुलवन्ती, अपने माँ-बाप की एकमात्र संतान थीं, और पिता गोवर्धन पांडे संस्कृत के पंडित थे, जिनका जीवन कर्मठता और धार्मिक नियमों के पालन में बीता। लेखक ने अपने नाना की शारीरिक विशेषताओं और उनके जीवनशैली के बारे में बताया है, जैसे कि नाना का लंबा कद और उनकी कम मेहनत करना। नानी का व्यक्तित्व भी उल्लेखनीय है, जो घर के कामों में व्यस्त रहती थीं और धार्मिक भजन गाने में रुचि रखती थीं। लेखक ने अपने बचपन के अनुभवों और उनकी परवरिश में नानी की भूमिका पर भी प्रकाश डाला है। इस जीवन-यात्रा में लेखक ने यह भी बताया कि वे अपनी जीवनी लिखने के बजाय जीवन-यात्रा लिखने का निर्णय क्यों लेते हैं। उनका मानना है कि जीवन के अनुभव और घटनाएँ महत्वपूर्ण हैं और वे दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं। उन्होंने अपनी लेखनी से उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को भी अंकित करने की कोशिश की है, जिससे पाठक उस समय की परिस्थितियों को बेहतर समझ सकें। लेखक ने अपनी यात्रा को विभिन्न चरणों में बांटा है और यह स्पष्ट किया है कि उनकी जीवन यात्रा में कई महत्वपूर्ण घटनाएं और अनुभव शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे अपनी लेखनी के माध्यम से अपने अनुभवों को साझा करना चाहते हैं, ताकि अन्य लोग भी उनसे सीख सकें।
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