मंत्र-विद्ध | Mantra-Vidya

By: राजेन्द्र यादव - Rajendra Yadav


दो शब्द :

इस पाठ में राजेंद्र यादव की कहानी "मंत्र-विद्ध" का वर्णन किया गया है। कहानी का मुख्य पात्र जयन्त है, जो इन्द्र के बेटे तक्षक के रूप में प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह कहानी लेखक के अनुभवों और विचारों के माध्यम से अपनी पहचान और साहित्यिक यात्रा को दर्शाती है। लेखक ने अपनी लेखन शैली और भाषा के चुनाव में कई चुनौतियों का सामना किया है। कहानी में पात्रों के बीच का संवाद और उनके मनोभावों का चित्रण किया गया है। तारक और सुरजीत के बीच की बातचीत से उनके जीवन के संघर्ष और प्यार की जटिलताओं का पता चलता है। सुरजीत की शादीशुदा जिन्दगी और तारक के प्यार की कहानी में तनाव और भावनाओं का गहराई से चित्रण किया गया है। लेखक ने यह भी बताया है कि कैसे उन्होंने अपनी कहानियों में यथार्थ को पकड़ने की कोशिश की है, और कैसे वे साहित्यिक रूढ़ियों से जूझते रहे हैं। कहानी में व्यक्ति की आंतरिक यात्रा और उसके अनुभवों का विस्तार से वर्णन किया गया है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर करता है। कहानी की पृष्ठभूमि कोलकाता है, जहां पात्रों के बीच का संबंध और उनकी भावनाएँ जटिलता को दर्शाती हैं। कहानी में प्रेम, दूरी, पहचान और जीवन के संघर्षों का एक समग्र चित्रण प्रस्तुत किया गया है, जो पाठक को एक गहरी सोच में डाल देता है।


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