सोना माटी | Sona Maati
- श्रेणी: साहित्य / Literature
- लेखक: विवेकी राय - Viveki Ray
- पृष्ठ : 464
- साइज: 10 MB
- वर्ष: 1956
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के करइल क्षेत्र का वर्णन किया है, जिसमें गाजीपुर और बलिया जिले शामिल हैं। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि यहां के गांवों और पात्रों के नाम काल्पनिक हैं, जबकि उनकी समस्याएँ और संघर्ष वास्तविक हैं। कहानी का केंद्र पात्र रामरूप है, जो अपने ससुर बाबू हनुमानप्रसाद की संपत्ति और करइल क्षेत्र में जीवन की कठिनाइयों से जूझता है। रामरूप अपनी स्थिति से परेशान है और उसे अपने ससुर के नाम पर उपनाम 'करइल' से घृणा है। उसकी स्थिति को और भी कठिन बनाता है करइल क्षेत्र का कीचड़ और बाढ़ का खतरा। रामरूप की परिस्थितियाँ उसके लिए एक प्रकार का मानसिक संघर्ष बन जाती हैं। वह अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों और आशंकाओं से लड़ा हुआ महसूस करता है, और उसे अपने भविष्य के लिए चिंता होती है। रामरूप की सोच में यह बात बार-बार आती है कि क्या वह कभी अपने ससुर की संपत्ति का एक अंश भी प्राप्त कर सकेगा? लेखक ने इस पाठ में जीवन की वास्तविकताओं और संघर्षों को बहुत संवेदनशीलता से चित्रित किया है। रामरूप की कठिनाइयाँ, उसकी मानसिक स्थिति और करइल क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियाँ इस कहानी का मुख्य आकर्षण हैं। पाठ में यह भी संकेत मिलता है कि व्यक्ति की स्थिति उसके समाज और परिवेश से बहुत हद तक प्रभावित होती है।
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