बुद्ध और बौद्ध धर्म | Buddha Aur Bauddh Dharm

By: आचार्य चतुरसेन शास्त्री - Acharya Chatursen Shastri


दो शब्द :

इस पाठ में महान बुद्ध और बौद्ध धर्म का वर्णन किया गया है। लेखक ने बुद्ध के जीवन की कहानी को विस्तार से प्रस्तुत किया है। बुद्ध का जन्म शाक्य जाति में हुआ था, और उनके पिता का नाम शुद्धोधन था। उनका बचपन सुख-समृद्धि में बीता, लेकिन उन्होंने मानवता के दुःखों पर विचार करते हुए तपस्या का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया। गौतम बुद्ध ने राजमहल के सुखों को छोड़कर, ज्ञान की खोज में घर से निकलने का संकल्प किया। उन्होंने कठोर तपस्या की, लेकिन इससे उन्हें सच्चा ज्ञान नहीं मिला। अंततः, एक दिन उन्होंने बोधिवृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए सत्य को पाया कि प्रेम और दया का भाव ही सच्चा तप है। इस ज्ञान के प्राप्त होने पर उन्होंने 'बुद्ध' का नाम धारण किया। बुद्ध ने अपने पहले शिष्यों को काशी में अपने उपदेश दिए, जिसमें उन्होंने दुःख, दुःख के कारण और दुःख निवारण के बारे में बताया। उन्होंने अपने सिद्धांतों को आठfold path के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें सही दृष्टिकोण, सही इरादा, सही भाषण, सही कार्य, सही जीवन, सही प्रयास, सही ध्यान आदि शामिल हैं। पाठ में बुद्ध के जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनके ज्ञान की खोज और बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों का उल्लेख किया गया है, जो मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। बौद्ध धर्म का उद्देश्य मानवता की भलाई, शांति और समर्पण को बढ़ावा देना है।


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