जीवाणु विज्ञानं | Jivanu Vigyan

- श्रेणी: विज्ञान / Science
- लेखक: आयुर्वेदाचार्य - Ayurvedaacharya
- पृष्ठ : 320
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1930
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दो शब्द :
यह पाठ जीवाणु विज्ञान पर आधारित है और इसे डॉ. भास्कर गोविंद घाणेकर द्वारा लिखा गया है। इसमें जीवाणुओं के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया गया है, जिसमें उनके प्रकार, वर्गीकरण और मानव स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव शामिल हैं। लेखक ने जीवाणुओं की परिभाषा, उनके जीवन चक्र, और उनकी विशेषताओं को विस्तार से समझाया है। जीवाणु विज्ञान की प्रथमिकता को ध्यान में रखते हुए, डॉ. घाणेकर ने इस विषय पर नए दृष्टिकोण और उपयोगी जानकारी प्रदान करने का प्रयास किया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि जीवाणु कई प्रकार के होते हैं, जैसे कि रोगजनक, सहजीवी, और परोपकारी जीवाणु। इस संदर्भ में, लेखक ने विभिन्न प्रकार के जीवाणुओं के उदाहरण दिए हैं, जैसे कि दाणु, कीटाणु, और उनके वर्गीकरण के तरीकों की चर्चा की है। इसके अलावा, जीवाणुओं के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव, जैसे कि रोग उत्पन्न करने की क्षमता, को भी महत्वपूर्ण माना गया है। लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को जीवाणुओं की मूलभूत जानकारी देने का प्रयास किया है, ताकि वे इस विज्ञान के प्रति जागरूक और समझदार बन सकें। अंत में, उन्होंने इस पुस्तक में मौजूद त्रुटियों के लिए पाठकों से क्षमा भी मांगी है और उन्हें सुझाव दिया है कि वे इस विषय पर अपनी समझ बढ़ाएं।
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