शाइरीके नये जोड़ | Shayari Ke Naye Jod: Jazbaat

- श्रेणी: काव्य / Poetry साहित्य / Literature
- लेखक: अयोध्याप्रसाद गोयलीय - Ayodhyaprasad Goyaliya
- पृष्ठ : 281
- साइज: 12 MB
- वर्ष: 1946
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने भारतीय शायरी के विकास और उसके विभिन्न मोड़ों का संक्षेप में वर्णन किया है। उन्होंने अपने अज्ञात हितैषी के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त की हैं, जिसमें उन्होंने एक पुरानी घटना को याद किया, जब उन्हें अंधा कहा गया था। इसके बाद, लेखक ने बताया है कि 1646 से 1658 के बीच शायरी में कई बदलाव हुए हैं, जिनमें प्रगतिशील शायरी का विशेष विकास हुआ है। प्रगतिशील शायरी को माक्सवादी विचारधारा से प्रेरित माना गया है और इसे नई शायरी, साम्यवादी शायरी या नवीन अदब के रूप में भी जाना जाता है। लेखक ने विभिन्न शायरों की विचारधाराओं का वर्गीकरण किया है, जिसमें तरक्की-पसंद शायर, नवीन शायर, और तरक्की-पसंद विरोधी शायर शामिल हैं। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि शायरी में आज़ादी, सामाजिक मुद्दे, और राजनीतिक विचारों का संयोग भी देखने को मिलता है। लेखक ने विभिन्न पत्रिकाओं से उद्धरणों का संकलन किया है ताकि पाठक को शायरी की विविधता और उसकी गहराई का अनुभव हो सके। अंत में, लेखक ने यह भी कहा है कि भविष्य में शायरी के इतिहास और अध्ययन को और विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे पाठक को शायरी के विकास की पूरी जानकारी मिल सके।
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