प्राचीन भारत का राजनीतिक तथा सांस्कृतिक इतिहास | Prachin Bharat Ka Rajnaitik Tatha Sanskritik Itihas

By: विमलचन्द्र पाण्डेय - Vimalchandra Pandey
प्राचीन भारत का राजनीतिक तथा सांस्कृतिक इतिहास  | Prachin Bharat Ka Rajnaitik Tatha Sanskritik Itihas by


दो शब्द :

यह पाठ प्राचीन भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास पर केंद्रित है, जिसमें लेखक डा. रामप्रसाद त्रिपाठी और विमल चंद्र पाण्डेय जैसे विद्वानों की रचनाओं का उल्लेख है। पुस्तक का उद्देश्य हिंदी में उच्च शिक्षा के लिए प्रामाणिक और विस्तृत सामग्री उपलब्ध कराना है। इसमें प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न पहलुओं की चर्चा की गई है, जिसमें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, और धार्मिक विषयों का समावेश है। पुस्तक की भूमिका में बताया गया है कि भारत के प्राचीन इतिहास की समझ और अध्ययन में नई दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि मौजूदा इतिहास की पुस्तकों में एकपक्षीयता और सीमित दृष्टिकोण है। लेखक का मानना है कि भारतीय इतिहास को समझने के लिए न केवल राजनीतिक घटनाओं का बल्कि सांस्कृतिक मान्यताओं और परंपराओं का अध्ययन करना आवश्यक है। पुस्तक में ऐतिहासिक स्रोतों के चार प्रमुख वर्गों का उल्लेख किया गया है: धार्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक और समसामयिक ग्रंथ, विदेशी विवरण, और पुरातात्विक साक्ष्य। इसमें धार्मिक ग्रंथों को महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि ये न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। पुस्तक में यह भी कहा गया है कि भारतीयों की इतिहास-बुद्धि को कमतर आंकना गलत है, क्योंकि महाभारत, रामायण, और पुराणों में ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख मिलता है। लेखक ने भारतीय इतिहास के निर्माण में विभिन्न स्रोतों के समेकन की आवश्यकता पर जोर दिया है। अंत में, पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय इतिहास के अध्ययन में विविध दृष्टिकोणों की आवश्यकता है ताकि एक समग्र और संतुलित चित्र सामने आ सके। लेखक का लक्ष्य है कि उनकी यह पुस्तक विश्वविद्यालयों के अध्यापकों और छात्रों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।


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