बुंदेलखंड में इस्लाम धर्म का प्रादुर्भाव अवं प्रभाव | Bundelkhand Mein Islam Dharm Ka Pradurbhav Aur Prabhav

By: अनीता दुबे - Anita Dubey
बुंदेलखंड में इस्लाम धर्म का प्रादुर्भाव अवं प्रभाव | Bundelkhand Mein Islam Dharm Ka Pradurbhav Aur Prabhav by


दो शब्द :

इस पाठ में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व का वर्णन किया गया है। बुन्देलखण्ड, जिसे भारत का हृदय स्थल माना जाता है, अनेक संस्कृतियों का संगम स्थल रहा है। यहाँ की प्राकृतिक संपदा और नदियाँ, जैसे चंबल, नर्मदा, बेतवा, और मंदाकिनी, जीवन और संघर्ष की प्रेरणा देती हैं। इस क्षेत्र में कई महान ऋषियों, संतों और कवियों ने साधना की है, जिन्होंने इसे सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र बनाया। पाठ में इस्लाम धर्म के आगमन की चर्चा की गई है, जिसमें बताया गया है कि प्रारंभ में इस्लामिक आक्रमणों के कारण यहाँ के लोगों में घृणा का भाव उत्पन्न हुआ, लेकिन बाद में फकीरों और सूफियों की सद्भावना ने हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई द्वारा बांदा नवाब को राखी भेजने का उदाहरण देकर साम्प्रदायिक सौहार्द की महत्ता को दर्शाया गया है। शोध कार्य का उद्देश्य बुन्देलखण्ड में इस्लाम के प्रादुर्भाव और उसके प्रभावों का अध्ययन करना है। यह शोध सात अध्यायों में विभाजित है, जिसमें क्षेत्र का परिचय, इस्लाम धर्म और संस्कृति, ऐतिहासिक परिदृश्य, संस्कृति और धर्म, मुस्लिम संस्कृति का प्रभाव, नई मान्यताएं और परंपराएं, और अंत में एक संक्षिप्त सारांश शामिल हैं। शोधकर्ता अनीता दुबे ने अपने मार्गदर्शक प्रो. बी.एन. राय के निर्देशन में इस कार्य को पूरा किया है और उन्होंने अपने सभी सहयोगियों और परिवार का आभार व्यक्त किया है। पाठ का समापन इस विश्वास के साथ किया गया है कि यह शोध प्रबंध पाठकों के लिए उपयोगी और रुचिकर सिद्ध होगा।


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