अमृता प्रीतम तीसरी औरत | Amrita Pritam: Teesri Aurat

By: अमृता प्रीतम - Amrita Pritam
अमृता प्रीतम तीसरी औरत | Amrita Pritam: Teesri Aurat by


दो शब्द :

इस पाठ में मीना की कहानी और उसके जीवन की जटिलताओं का वर्णन किया गया है। मीना के जीवन में जादू और अंधकार का संघर्ष है, जिसमें वह अपने पति के निधन के बाद अपने पीहर लौटती है। उसके पति की मृत्यु की खबर उसे एक सरकारी पत्र के माध्यम से मिलती है, जो उसके लिए एक अर्थी की तरह प्रतीत होती है। मीना के माता-पिता उसकी स्थिति को समझते हैं, लेकिन उनकी गूंगी स्थिति यह दर्शाती है कि वे इस दुखदायी घटना को सहन नहीं कर पा रहे हैं। मीना का घर, जो एक समय खुशी और उत्सव का स्थान था, अब दुख और शोक का प्रतीक बन गया है। घर में हर कमरे का दरवाजा एक घटना के साथ खुलता और बंद होता है, जो मीना के जीवन की घटनाओं को दर्शाता है – विवाह, जन्म, मृत्यु और तलाक। मीना के परिवार के सदस्यों के अनुभव भी इस बात को उजागर करते हैं कि कैसे औरतें अपने पुरुषों की मृत्यु के बाद कई बार मरती हैं, और उनकी स्थिति समाज में एक भारी बोझ बन जाती है। मीना का कमरा, जो पहले खुशी का प्रतीक था, अब उसकी अर्थी के समान प्रतीत होता है। यह कहानी जीवन में आने वाले दुखों, यादों और महिलाओं की संघर्षशीलता को दर्शाती है।


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