मानव भूगोल के सिद्धांत | Manav Bhugol Ke Siddhant

- श्रेणी: भूगोल / Geography शिक्षा / Education
- लेखक: डॉ आर के मुखर्जी - Dr. R. K. Muherjee
- पृष्ठ : 116
- साइज: 16 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में मानव भूगोल और उसके विकास के इतिहास का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे एक बच्चा अपने जन्म के बाद विभिन्न वस्तुओं और वातावरण से परिचित होता है और उसकी जिज्ञासा उसे ज्ञान की ओर अग्रसर करती है। मनुष्य की यह मूल वृत्ति प्राचीन काल से चली आ रही है, जब आदिम मानव ने अपने चारों ओर के भौतिक वातावरण का अध्ययन किया और उसे अपने जीवन में शामिल किया। पाठ में भूगोल के अर्थ और उसके विकास का इतिहास भी प्रस्तुत किया गया है। यह बताया गया है कि भूगोल केवल पृथ्वी का वर्णन नहीं है, बल्कि यह एक विज्ञान है जो मानव जीवन और उसके परिवेश के बीच के संबंधों का अध्ययन करता है। प्राचीन यूनान, रोमन साम्राज्य और मध्यकालीन मुस्लिम सभ्यता के दौरान भूगोल के अध्ययन में विभिन्न योगदानों का उल्लेख किया गया है। आधुनिक भूगोल का आरंभ 16वीं शताब्दी से हुआ, जब इसे पृथ्वी विज्ञान के रूप में मान्यता मिली। भूगोलवेत्ताओं ने विभिन्न दृष्टिकोणों से इस विषय का अध्ययन किया, जैसे कि भौतिक भूगोल, मानव भूगोल और उनके बीच के संबंध। पाठ में यह भी कहा गया है कि भूगोल का अध्ययन न केवल भौतिक तत्वों पर आधारित है, बल्कि यह मानव क्रियाकलापों और प्राकृतिक वातावरण के बीच के जटिल संबंधों को भी समझने का प्रयास करता है। अंत में, पाठ में यह चिंता व्यक्त की गई है कि कई लोग भूगोल को एक सामान्य विषय मानते हैं और इसे उचित सम्मान नहीं देते। भूगोल का ज्ञान विभिन्न विज्ञानों का आधार है और यह सामाजिक और भौतिक विज्ञानों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए, यह आवश्यक है कि लोग भूगोल के महत्व को समझें और इसे एक गंभीर विद्या के रूप में स्वीकार करें।
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