मानसपीयूष (सुन्दर कांड) | Manaspiyush (Sundar Kand)

By: महात्मा श्री अंजनीनन्दन शरणजी - Mahatma Sri Anjaninandan Sharanji


दो शब्द :

यह पाठ श्रीरामचरितमानस के 'सुंदरकांड' के विभिन्न टीकाओं और टिप्पणियों का संकलन है, जिसे 'मानसपीयूष' नाम से प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य रामायण के गूढ़ अर्थों को समझाना और भक्तों के लिए श्रीराम के चरित्रों का गुणगान करना है। इसमें विभिन्न विद्वानों की अप्रकाशित टिप्पणियों को शामिल किया गया है, जो रामायण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती हैं। लेखक ने इस ग्रंथ के माध्यम से उन भक्तों का वर्णन किया है, जिन्हें श्रीराम ने 'सुत' का पद दिया है और जिनका गुणगान स्वयं श्रीराम करते हैं। इसमें भक्तों को शरणागति और उनकी कृपा की महिमा का भी वर्णन किया गया है। लेखक ने यह पुस्तक उन भक्तों को समर्पित की है, जो श्रीराम के चरित्र को आदर्श मानते हैं और उनके प्रति श्रद्धा रखते हैं। ग्रंथ में विभिन्न विद्वानों की टिप्पणियों को संकलित किया गया है, जिससे पाठकों को रामायण की गहराई तक पहुँचने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, लेखक ने साहित्यिक चोरी की समस्या पर भी ध्यान आकर्षित किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस ग्रंथ का उद्देश्य न केवल धार्मिक बल्कि साहित्यिक integrity को भी बनाए रखना है। अंत में, लेखक ने पाठकों से यह आशा व्यक्त की है कि वे इस ग्रंथ से लाभान्वित होंगे और श्रीराम की कृपा को अपने जीवन में अनुभव करेंगे।


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