इंकलाब | Inquilab by


दो शब्द :

इस पाठ में अनवर नामक एक बच्चे की कहानी है, जो मौलवी साहब के पास कुरान पढ़ने के लिए जाता है। मौलवी साहब की लंबी सफेद दाढ़ी और उनके अजीब-अजीब हाव-भाव बच्चे के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। अनवर कुरान की आयते याद करने की कोशिश कर रहा है, उसे जन्नत में जाने की बात समझाई जा रही है, और वह सोचता है कि गर्मी में जन्नत जाना बेहतर होगा क्योंकि वहां का मौसम हमेशा ठंडा रहता है। अनवर का मन गर्मी में आइसक्रीम खाने और ठंडे शरबत का भी होता है, लेकिन उसके पिता ने उसे इन चीजों से मना कर रखा है। अनवर सोचता है कि जन्नत में हरे-भरे पेड़, दूध और शहद की नदियां हैं, लेकिन वह सोचता है कि जन्नत में कौन-कौन सी औरतें होती हैं। उसे अपनी विधवा फूफी और काली नौकरानी जैसी औरतों का ख्याल आता है, पर वह सोचता है कि वे जन्नत की हूरों जैसी नहीं हो सकतीं। एक दिन, जब अनवर अपने पिता के साथ बाजार जा रहा होता है, तो वह कुछ सुंदर हसीनाओं को देखता है और उनकी खूबसूरती से मंत्रमुग्ध हो जाता है। उसके पिता उसे इन औरतों की तरफ देखने से मना करते हैं, जिससे उसका मन और भी उत्तेजित हो जाता है। अनवर को कबूतर उड़ते हुए देखकर बहुत खुशी होती है, क्योंकि उसे कबूतरबाजी का शौक है, जबकि उसके पिता इसे एक फिजूल का काम मानते हैं। कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है जब अनवर और उसकी बहन अंजुम एक बड़े कबूतर को देखते हैं, जो उनके ध्यान को कुरान से हटा देता है। मौलवी साहब बच्चों को डांटते हैं कि उनका ध्यान पढ़ाई से हट रहा है। अनवर ने कबूतर के उड़ते हुए दृश्य को देखकर खुशी और उत्साह व्यक्त किया, जो उसके लिए एक नई दुनिया के दरवाजे खोलता है। इस तरह, अनवर की कहानी उसके भीतर के द्वंद्व, उसके सपने और उसके परिवेश के प्रति उसकी जिज्ञासा को दर्शाती है।


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