बक्सों का स्वास्थय और उनके रोग | Bakson Ka Swasthya Aur Unke Rog

By: मित्तलदास - Mittaldas
बक्सों का स्वास्थय और उनके रोग | Bakson Ka Swasthya Aur Unke Rog by


दो शब्द :

इस पाठ में बच्चों के स्वास्थ्य, उनके पोषण और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर चर्चा की गई है। प्राकृतिक चयन के सिद्धांत के अनुसार, केवल स्वस्थ बच्चे ही जीवित रह पाते हैं, और यदि कोई बच्चा जनन दोषों के साथ पैदा होता है, तो उसके जीवित रहने की संभावना कम होती है। माता-पिता के स्वास्थ्य का प्रभाव बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है, और यह स्पष्ट किया गया है कि बच्चों की सेहत में केवल मां का ही नहीं बल्कि पिता का भी योगदान होता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि बच्चों का उचित पोषण न मिलना, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। अपूर्ण पोषण बच्चों में कई प्रकार के स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न करता है। बच्चे जब स्वस्थ नहीं होते, तो वे मानसिक और शारीरिक विकास में भी पिछड़ जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, वे अपनी जिज्ञासा और सक्रियता खो देते हैं। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य का भी बच्चों के समग्र विकास पर गहरा असर होता है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आवश्यक है, क्योंकि मन और शरीर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पाठ में माता-पिता को अपने बच्चों के पालन-पोषण और स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है, ताकि वे स्वस्थ और समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकें। अंत में, पाठ में यह उम्मीद जताई गई है कि इस पुस्तक के माध्यम से माता-पिता को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा सकेगा, जिससे वे बेहतर तरीके से अपने बच्चों का पालन कर सकें और भविष्य में राष्ट्र के स्वस्थ नागरिकों का निर्माण कर सकें।


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