मैथिलि लोकगीत | Maithili Lokgeet

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति संगीत / Music
- लेखक: पं. अमरनाथ झा - Pt. Amarnath Jha
- पृष्ठ : 435
- साइज: 19 MB
- वर्ष: 1955
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दो शब्द :
इस पाठ में मैथिली लोकगीतों का संग्रह और उनके महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक श्री रामहक्वालसिंह 'राकेश' ने वर्षों तक विभिन्न गाँवों में जाकर लोकगीतों को इकट्ठा किया है, जिससे मैथिली लोकसाहित्य को एक नया रूप दिया गया है। इस पुस्तक में विभिन्न प्रकार के गीतों का समावेश किया गया है, जैसे सोहर, जनेऊ के गीत, लग्न-गीत, समदाउनि आदि। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि लोकगीत जनजीवन के असली भावनाओं और अनुभवों का परिचायक होते हैं। ये गीत न केवल खुशी और उत्सव के क्षणों को बल्कि दुःख और कठिनाइयों को भी व्यक्त करते हैं। लोकगीतों की विशेषता यह है कि ये सभी वर्गों के लोगों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं, चाहे वे गाँव के निवासी हों या शहर के। पुस्तक की भूमिका में पंडित अमरनाथ ने इस संग्रह के महत्व को रेखांकित किया है और बताया है कि यह मैथिली भाषा और संस्कृति की समृद्धि को दर्शाता है। मैथिली की साहित्यिक परंपरा एक प्राचीन और विविधतापूर्ण धरोहर है, जिसमें विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों का समावेश है। इस प्रकार, यह पाठ मैथिली लोकगीतों के संग्रह और उनके सामाजिक, सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है, साथ ही यह भी दर्शाता है कि राकेश जी का यह प्रयास साहित्यिक संस्थाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। लोकगीतों के माध्यम से मानव अनुभवों की गहराई और विविधता को समझने का एक अवसर मिलता है।
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