मुद्राराक्षस | Mudra Rakshas

By: विशाखदत्त - Vishakhadatta
मुद्राराक्षस | Mudra Rakshas by


दो शब्द :

संस्कृत नाटक "मुद्राराक्षस" विशाखदत्त द्वारा रचित है और इसे भारतीय साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इस नाटक की विशेषताएँ यह हैं कि इसमें सभी पुरुष पात्र हैं और केवल एक स्त्री पात्र है, जिसका कथानक से कोई मुख्य संबंध नहीं है। यह नाटक मौर्यकालीन भारतीय राजनीतिक स्थितियों को दर्शाता है, जिसमें चाणक्य की चतुराई और राजनीतिक दांव-पेंचों का विस्तृत चित्रण किया गया है। "मुद्राराक्षस" का अर्थ है "राक्षस की अंगूठी", जो नाटक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चाणक्य इस अंगूठी के माध्यम से राक्षस के छिपने का पता लगाता है और राजनीतिक खेल शुरू करता है। विशाखदत्त के नाटक में निरंतरता और रोचकता बनी रहती है, जिससे दर्शकों का ध्यान अंत तक बना रहता है। विशाखदत्त का पारिवारिक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है, और उन्हें एक नीतिज्ञ और कवि माना जाता है। उनका नाटक न केवल राजनीति पर आधारित है, बल्कि इसमें सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ भी हैं। नाटक में चाणक्य और राक्षस के बीच की प्रतिस्पर्धा को प्रमुखता दी गई है, जिसमें चाणक्य अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर सफल होता है। कुल मिलाकर, "मुद्राराक्षस" नाटक एक गहन राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें चाणक्य की चतुराई और राक्षस की कायरता को उजागर किया गया है। यह नाटक न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है बल्कि इसे साहित्यिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।


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