मानस का हंस | Manas Ka Hans

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता जीवनी / Biography
- लेखक: अमृतलाल नागर - Amritlal Nagar
- पृष्ठ : 366
- साइज: 8 MB
- वर्ष: 1975
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने अपने मित्र महेश कौल के साथ हुई बातचीत के माध्यम से तुलसीदास के जीवन और उनकी रचनाओं पर विचार किया है। लेखक ने यह बताया कि किस तरह महेश जी के साथ चर्चा के दौरान उन्हें तुलसीदास पर उपन्यास लिखने की प्रेरणा मिली। उन्होंने तुलसीदास के जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी की कमी का उल्लेख किया और बताया कि विभिन्न विद्वानों द्वारा प्रस्तुत जीवनचरित कितने प्रामाणिक नहीं हैं। लेखक ने तुलसीदास के कार्यों, विशेषकर 'रामचरितमानस', 'कवितावली', और 'विनयपत्रिका' का अध्ययन किया और उन कृतियों के माध्यम से तुलसीदास के संघर्ष और समर्पण को उजागर किया। उन्होंने तुलसीदास को एक जनवादी दृष्टिकोण से देखा, जो समाज के विभिन्न वर्गों के प्रति सहानुभूति रखते थे। इसके अलावा, लेखक ने तुलसीदास के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया, जैसे कि उनके व्यक्तिगत जीवन और उनकी पत्नी के प्रति प्रेम। उन्होंने तुलसीदास के धार्मिक और सांस्कृतिक योगदान को भी रेखांकित किया। पाठ के अंत में लेखक ने अपनी भावनाओं और प्रेरणाओं को साझा किया, जो उन्हें इस उपन्यास को लिखने में मददगार साबित हुईं। उन्होंने अपने मित्रों और साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने उन्हें इस कार्य में सहायता प्रदान की। अंततः, यह पाठ तुलसीदास के जीवन और उनकी कृतियों की गहराई को समझने का एक प्रयास है।
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