बुद्ध- कथा | Buddha Katha

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता बौद्ध / Buddhism
- लेखक: रघुनाथ सिंह - Raghunath Singh
- पृष्ठ : 918
- साइज: 29 MB
- वर्ष: 1939
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दो शब्द :
इस पाठ में बुद्ध की कथा का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया है, जिसमें जीवन के दुख, मृत्यु, और मानव के अस्तित्व के प्रश्नों पर विचार किया गया है। लेखक ने जीवन के विभिन्न पहलुओं की चर्चा की है, जैसे जन्म, दुख, और मृत्यु, और यह बताया है कि ये तत्व मानव के जीवन में निरंतर उपस्थित रहते हैं। लेखक का कहना है कि मनुष्य ने सदियों से इन प्रश्नों का उत्तर खोजने की कोशिश की है, लेकिन फिर भी वह दुख और पीड़ा का अनुभव करता है। पाठ में यह विचार किया गया है कि ईश्वर की कल्पना और विश्वास ने मानव को दुखों से बचाने में असफल रहा है। हालांकि, ईश्वर के प्रति विश्वास ने कुछ लोगों को शक्ति दी है, परंतु इसके परिणामस्वरूप हिंसा और संघर्ष भी बढ़े हैं। विभिन्न धर्मों और आस्थाओं के बीच संघर्ष का वर्णन करते हुए लेखक ने बताया कि यह विश्वास और आस्था कभी-कभी मानवता के लिए विनाशकारी बन जाती है। इस प्रकार, बुद्ध की शिक्षाओं के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि दुख और पीड़ा का सामना करना और उनके कारणों को समझना आवश्यक है। बुद्ध ने यह सिखाया कि मनुष्य को अपने भीतर की शक्ति को पहचानना चाहिए और अपने जीवन को स्वयं के कर्मों से संचालित करना चाहिए, न कि बाहरी शक्तियों पर निर्भर रहकर। इस पाठ में मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य और दुखों के समाधान की खोज का महत्व दर्शाया गया है।
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