सचित्र भक्तामर स्तोत्र | Sachitra Bhaktamar Stotra

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता जैन धर्म/ Jainism
- लेखक: नीरज जैन - Neeraj Jain
- पृष्ठ : 465
- साइज: 13 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में जिनेश्वर (तीर्थंकर) देव की स्तुति की गई है। इसे भक्तामर स्तोत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें संक्षेप में यह बताया गया है कि भक्तजन जिनेश्वर देव के चरणों में समर्पण करते हैं और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। ये चरण पापरूपी अंधकार को समाप्त करने वाले और संसार के दुखों से मुक्ति दिलाने वाले हैं। भक्तजन जिनेश्वर की भक्ति करते हुए अपने मन, वचन, और काय से प्रणाम करते हैं, जिससे उन्हें तत्त्वज्ञान की प्राप्ति होती है। यह पाठ भक्तों के प्रति प्रेरणा देता है कि वे जिनेन्द्र देव के चरणों में श्रद्धा और भक्ति से नमस्कार करें। जिनेश्वर देव की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वे भक्तों के लिए आलंबन और सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे वे संसार के दुखों से पार हो सकते हैं। पाठ में जिनेश्वर देव के पहले तीर्थंकर आदिनाथ की विशेषता भी बताई गई है, जो भक्तों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। इसके अलावा, पाठ में यह भी बताया गया है कि जिनेश्वर देव की स्तुति करने से भक्तों के जीवन में मंगल की प्राप्ति होती है। भक्तों की भक्ति को महत्वपूर्ण मानते हुए यह संकेत दिया गया है कि भक्ति में नमस्कार का स्थान सर्वोपरि है। इस प्रकार, यह पाठ भक्ति, श्रद्धा और तत्त्वज्ञान की ओर मार्गदर्शन करता है।
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