वेणीसंहार-नाटकम् | Venisamhara- Natakam

By: श्री भट्टनारायण - Shri Bhattnarayan
वेणीसंहार-नाटकम् | Venisamhara- Natakam by


दो शब्द :

पाठ में "वेणीसंहार" नामक नाटक का उल्लेख किया गया है, जिसे कविवर त्रिमट्टनारायण ने लिखा है। यह नाटक भारतीय सांस्कृतिक साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें भगवान श्री कृष्ण और राधिका के बीच के प्रेम संबंधों को दर्शाया गया है, जहाँ राधिका की अप्रसन्नता और कृष्ण की प्रेम भरी चेष्टाओं का वर्णन किया गया है। नाटक में संवाद और काव्यात्मक शैली का उपयोग किया गया है, जिसमें प्रेम, करुणा, और आशा की भावनाएँ व्यक्त की गई हैं। कथानक में, कृष्ण राधिका के पीछे चलते हैं, और उनके प्रति अपने प्रेम को प्रकट करते हैं। राधिका की अप्रसन्नता धीरे-धीरे दूर होती है जब वे कृष्ण की भक्ति और प्रेम को महसूस करती हैं। नाटक में विभिन्न पात्रों का संवाद, और भावनाओं का गहन चित्रण है, जो दर्शकों के मन को छूता है। इसके अलावा, नाटक में देवी-देवताओं का भी उल्लेख है, जो आश्रय और सुरक्षा का प्रतीक हैं। यह नाटक धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारतीय मिथकों और परंपराओं को उजागर करता है। इस प्रकार, "वेणीसंहार" नाटक प्रेम, भक्ति, और भारतीय संस्कृति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो न केवल मनोरंजन करता है, बल्कि गहरी सोच और भावनाओं को भी जागृत करता है।


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