भारतीय सामंतवाद | Bharatiya Samantvad

- श्रेणी: Freedom and Politics | आज़ादी और राजनीति इतिहास / History
- लेखक: रामशरण शर्मा - Ramshran Sharma
- पृष्ठ : 340
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1973
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश भारतीय सामन्तवाद के इतिहास और विकास पर केंद्रित है। लेखक ने सामन्तवाद की परिभाषा और इसके विभिन्न स्वरूपों का विश्लेषण किया है। उन्होंने बताया है कि सामन्तवाद की परिभाषा विभिन्न विद्वानों द्वारा भिन्न-भिन्न तरीके से दी गई है और यह ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में भिन्नता रखती है। इस पुस्तक में लेखक ने भारतीय सामन्तवाद के लगभग नौ सौ वर्षों के इतिहास का विवेचन किया है, जिसमें मुख्य रूप से उत्तर भारत का अध्ययन किया गया है। सामन्तवाद के राजनीतिक और आर्थिक पहलुओं का गहन विश्लेषण किया गया है, जबकि सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर कम ध्यान दिया गया है। लेखक ने सामन्तवाद की शुरुआत, उसकी संरचना, और उसके प्रभावों का भी अध्ययन किया है। पुस्तक में यह भी बताया गया है कि सामन्तवाद का विकास कैसे हुआ और किस प्रकार भूमि के अधिकार और किसानों की स्थिति इससे प्रभावित हुई। सामन्तवाद का मुख्य आधार भूमि के अधिकारों पर आधारित था, जिसमें किसानों को भूमि जोतने के लिए सामन्तों को लगान देना पड़ता था। लेखक ने गुप्त काल और इसके बाद के समय में सामन्तवाद के विभिन्न पहलुओं का भी उल्लेख किया है, जैसे कि ब्राह्मणों को भूमि दान देने की प्रथा और इसके साथ जुड़े प्रशासनिक अधिकार। अंत में, लेखक ने यह भी कहा है कि इस अध्ययन का उद्देश्य भारतीय इतिहास के शोधकर्ताओं में इस विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना है।
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