लोपामुद्रा | Lopamudra

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता महिला / Women
- लेखक: कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी - Kanaiyalal Maneklal Munshi
- पृष्ठ : 118
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1948
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दो शब्द :
"लोपामुद्रा" एक काल्पनिक उपन्यास है जो ऋग्वेद के प्रसंगों और उस समय के महान व्यक्तित्वों पर आधारित है। लेखक कन्हैयालाल माणेकलांल सुनशी ने इसे लिखा है और इसमें ऋग्वेद के जीवन, इतिहास और उस काल की सामाजिक संरचना का वर्णन किया गया है। उपन्यास में वर्णित समय में आर्य और दस्युओं के बीच संघर्ष और भिन्नता को दर्शाया गया है। ऋग्वेद में उल्लेखित घटनाओं के माध्यम से उस समय की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति का चित्रण किया गया है। आर्य लोग विभिन्न जातियों में विभाजित थे, और उनका जीवन कृषि, पशुपालन, व्यापार और युद्ध से संबंधित था। दस्यु लोग, जो मूल निवासी थे, उनके साथ संघर्ष करते थे और उनकी संस्कृति में भिन्नता थी। उपन्यास में लोपामुद्रा नामक एक ऋषि की पत्नी का भी वर्णन है, जिसने अगस्त्य ऋषि को पति बनाया। लोपामुद्रा के मंत्रों का उल्लेख भी किया गया है, जो ऋग्वेद में पाए जाते हैं। लेखक ने इस काल की सामाजिक समानता, स्त्रियों की स्थिति, और कर्म के आधार पर राजन्य और ऋषि बनने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला है। इस उपन्यास के माध्यम से, लेखक ने उस समय के मानव स्वभाव और सामाजिक व्यवस्था को समझाने का प्रयास किया है, और यह दर्शाया है कि कैसे आर्य लोग अपनी विद्या और संस्कृति के माध्यम से समाज में बदलाव लाने का प्रयास कर रहे थे।
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