सम्राट विक्रमादित्य | amrat Vikramaditya

- श्रेणी: इतिहास / History जीवनी / Biography
- लेखक: राजशेखर व्यास - Rajshekhar Vyas
- पृष्ठ : 390
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 1990
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दो शब्द :
विक्रम सवत्सर का प्रवर्तन भारतीय इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, जो दो हजार वर्षों से अधिक पुराना है। विक्रमादित्य के समय तक भारत में विभिन्न महापुरुषों और घटनाओं का उल्लेख मिलता है, जैसे कि बौद्ध धर्म का उदय, मौर्य साम्राज्य का विकास, और भारतीय संस्कृति का व्यापक प्रसार। इस काल में अनेक विद्वानों और कवियों की प्रतिभा भी उभरी, जैसे कि कालिदास और भवभूति। हालांकि, दूसरी सहस्त्राब्दी में भारत का भाग्य निराशाजनक रहा, लेकिन उसके आंतरिक जीवन में गिरावट नहीं आई। विक्रम सवत्सर और इसके पीछे की संस्कृति आज भी भारतीयों के लिए गर्व का विषय हैं। विक्रमादित्य की स्मृति और उनके योगदान को याद करते हुए, पंडित सुय्यनारायण व्यास ने विक्रम सवत्सर के दो हजार वर्ष पूर्ण होने पर एक मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया। पंडित व्यास ने विक्रम के नाम पर एक विश्वविद्यालय, पुरातत्त्व संग्रहालय, स्मृति स्तंभ, और एक स्मृति-प्रथ का गठन करने का संकल्प लिया। उनकी इस योजना में महाराजा जीवाजीराव सिंधिया का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। उन्होंने विक्रम उत्सव के लिए धन एकत्रित किया और विभिन्न सुधार कार्यों की योजना बनाई, जिसमें उज्जैन के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों का विकास शामिल था। यह योजना केवल एक ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और शौर्य की पुनर्स्थापना का एक प्रयास था, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवमयी अतीत का ज्ञान हो सके। विक्रमादित्य और उज्जयिनी की महिमा को उजागर करने के लिए यह आयोजन एक महत्वपूर्ण कदम था।
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