भातखण्डे संगीत शास्त्र | Bhatkhande Sangeet Shastra

By: विष्णुनारायण - Vishnunarayan
भातखण्डे संगीत शास्त्र | Bhatkhande Sangeet Shastra by


दो शब्द :

यह पाठ पं. विष्णुनारायण भातखण्डे द्वारा लिखित "हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति" का चौथा भाग है, जिसका हिंदी में अनुवाद किया गया है। इस ग्रंथ में संगीत की विधिवत चर्चा की गई है और भातखण्डे जी के संगीत के प्रति समर्पण और ज्ञान का वर्णन किया गया है। भातखण्डे जी ने अपने जीवन में संगीत के लिए अपने अनुभवों को संजोया और उसे एक व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय संगीत में परंपरागत ज्ञान को एकत्रित कर उसे समकालीन पीढ़ी के लिए सुलभ बनाया। संगीत की इस पद्धति में उन्होंने विभिन्न मतों का उल्लेख किया है और संगीत की विभिन्न शाखाओं का अध्ययन किया है। भातखण्डे जी ने संगीत को केवल एक कला के रूप में नहीं, बल्कि इसे एक विज्ञान के रूप में भी देखा। उन्होंने संगीत की संरचना को समझने के लिए कई दार्शनिक और शास्त्रीय ग्रंथों का अध्ययन किया और उन्हें अपने काम में शामिल किया। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि भातखण्डे जी ने अपने कार्य के माध्यम से संगीत को एक नई दिशा दी, जिससे संगीत की जटिलताओं को समझने में सहायता मिली। उनका योगदान संगीत की शिक्षा और उसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण रहा है। भातखण्डे जी के कार्यों ने संगीत के क्षेत्र में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और वे संगीत के प्रति गहरी रुचि रखने वालों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए। अंत में, उनके योगदान की सराहना करते हुए, उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई है।


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