हिंदी के जनपद संत | Hindi Ke Janpad Sant

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता भारत / India साहित्य / Literature
- लेखक: जगजीवन राम - Jagjeevan Ram
- पृष्ठ : 615
- साइज: 48 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में भारत के संतों की परंपरा, विशेषकर जनपद संतों की भूमिका और उनके योगदान का वर्णन किया गया है। यह संत जन साधारण की भाषा में अपने उपदेशों को प्रसारित करते हैं और अपने अमृत वचनों से जनता को जागरूक करते हैं। ये संत तुलसी, कबीर, रैदास, मीरा आदि की परंपरा से जुड़े हुए हैं और उनकी वाणी में जीवन पर गहरा प्रभाव डालने की क्षमता होती है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि संतों का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत 'स्व' को पराजित करना है, जिससे वे जनमानस के लिए मार्गदर्शक बन सकें। संतों ने अपनी साधना के माध्यम से भारत के विभिन्न प्रांतों में धार्मिक और सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य किया है। ग्रंथ के संपादक इस बात की इच्छा व्यक्त करते हैं कि भविष्य में अन्य संतों के व्यक्तित्व और कृतित्व को भी प्रस्तुत किया जाए ताकि हिंदी के जनपद संतों की पहचान और उनके योगदान को और बेहतर ढंग से समझा जा सके। इसके अलावा, पाठ में यहूदियों के संतों की परंपरा का भी वर्णन है, जो अपने जीवन में उच्च नैतिकता और बलिदान का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। यहूदी संतों का आचार-व्यवहार और उनका बलिदान उनके धर्म और जाति के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है। संतों का यह जीवन संघर्ष और आत्म बलिदान की भावना से भरा होता है, जो उन्हें महान बनाता है। संक्षेप में, इस पाठ में संतों की भाषा, उनके उपदेशों और उनके समाज में योगदान का महत्व दर्शाया गया है, साथ ही यह भी बताया गया है कि संतों की परंपरा मानवता के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
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