महाराजा सूरजमल जाट | Maharaja Surajmal Jat

- श्रेणी: इतिहास / History जीवनी / Biography
- लेखक: उपेन्द्रनाथ शर्मा - Upendranath Sharma
- पृष्ठ : 500
- साइज: 10 MB
- वर्ष: 1986
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दो शब्द :
इस पाठ में जाटों के इतिहास, विशेष रूप से महाराजा सूरजमल के समय (1684-1763) को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। लेखक उपेन्द्रनाथ शर्मा ने जाटों के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास का विश्लेषण किया है, जिसमें मुगलों और मराठों के साथ उनके संघर्ष का वर्णन किया गया है। पाठ में बताया गया है कि मुगलों की धर्मांध नीतियों के विरोध में जाटों ने एकजुटता दिखाई और इस समय के दौरान ब्रजभूमि में जाटों की सत्ता का विकास हुआ। सूरजमल का प्रारंभिक जीवन और उनके व्यक्तित्व का विकास भी इस अवधि में महत्वपूर्ण है। लेखक ने उल्लेख किया है कि राव बदन सिंह, जो जाट राज्य के संस्थापक थे, के योगदान को भी रेखांकित किया गया है। सूरजमल ने मुगलों के साथ कई संघर्ष किए और अपनी सैन्य और राजनीतिक रणनीतियों के माध्यम से जाट राज्य का विस्तार किया। इस ग्रंथ में कई ऐतिहासिक स्रोतों का उपयोग किया गया है, जिसमें फारसी, मराठी, हिंदी और अन्य भाषाओं की सामग्री शामिल है। लेखक ने जाटों के इतिहास को एक ठोस और प्रमाणिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है, जिससे जाटों के सांस्कृतिक और राजनीतिक योगदान का महत्व उजागर होता है। पाठ का उद्देश्य जाटों के इतिहास को पुनर्जीवित करना और उनकी पहचान को स्पष्ट करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनके योगदान को समझ सकें और सराह सकें।
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