चन्द्रगुप्त मौर्य | Chandragupta Maurya

By: जयशंकर प्रसाद - jayshankar prasad
चन्द्रगुप्त मौर्य | Chandragupta Maurya by


दो शब्द :

"चन्द्रगुप्त मोर्य" एक ऐतिहासिक नाटक है जिसे प्रसिद्ध लेखक और कवि प्रसाद जी ने रचा है। यह नाटक चन्द्रगुप्त मौर्य के जीवन और उनके शासन के समय की स्थितियों पर आधारित है। प्रसाद जी ने इस नाटक के माध्यम से उस समय की सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक परिस्थितियों का विस्तृत चित्रण किया है। इस नाटक में उस समय के आर्य समाज की स्थिति, धर्म परिवर्तन और बौद्ध धर्म के प्रचार का भी उल्लेख किया गया है। चन्द्रगुप्त मौर्य का उदय एक ऐसे समय में होता है जब आर्य समाज के मूल्य और धर्म संकट में थे। नाटक में दिखाया गया है कि किस प्रकार चन्द्रगुप्त ने अपने नेतृत्व में मौर्य साम्राज्य की स्थापना की और अपने समय के अन्य शक्तिशाली राजाओं को पराजित किया। इस नाटक की विशेषता यह है कि यह न केवल ऐतिहासिक घटनाओं को दर्शाता है, बल्कि उसमें मानवीय भावनाओं, संघर्षों और विजय की कहानियाँ भी समाहित हैं। प्रसाद जी की लेखनी में गहराई और भावनात्मकता है, जो पाठकों को चन्द्रगुप्त के चरित्र से जोड़ती है। ऐतिहासिक संदर्भ में, चन्द्रगुप्त का नाम ग्रीक इतिहासकारों द्वारा भी लिया गया है और उनका शासन भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। नाटक में चन्द्रगुप्त के द्वारा स्थापित मौर्य साम्राज्य की नींव और उसके बाद के राजाओं के शासन का भी उल्लेख है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चन्द्रगुप्त का योगदान भारतीय इतिहास में कितना महत्वपूर्ण था। इस प्रकार, "चन्द्रगुप्त मोर्य" एक उत्कृष्ट नाटक है जो न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें मानवीय संवेदनाओं और संघर्षों का भी गहरा चित्रण है।


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