परिचन्न(महासमर) वॉल-६ | Parichann (Mahasamar) Vol-6
- श्रेणी: इतिहास / History साहित्य / Literature
- लेखक: नरेन्द्र कोहली - Narendra kohli
- पृष्ठ : 615
- साइज: 22 MB
- वर्ष: 1991
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दो शब्द :
इस पाठ में नरेन्द्र कोहली ने गंधार की राजकुमारी गांधारी और उसके भाई शकुनि के बीच के संवाद को प्रस्तुत किया है। गांधारी, जो अपने पुत्र दुर्योधन की माँ है, अपने भाई शकुनि से इस बात की चर्चा करती है कि दुर्योधन विनाश की ओर बढ़ रहा है। वह चाहती है कि शकुनि अपने भाई को विनाश के मार्ग पर ले जाने से रोके, जबकि शकुनि दुर्योधन की उपलब्धियों और उसकी शक्ति को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। गांधारी का कहना है कि शकुनि ने दुर्योधन के मन में ईर्ष्या और अधर्म की भावना को भड़काया है, जो अंततः विनाश की ओर ले जाएगी। वह अपने भाई को चेतावनी देती है कि उसे दुर्योधन को धर्म और उच्चतर जीवन की ओर प्रेरित करना चाहिए, न कि उसे महत्त्वाकांक्षा और हिंसा की ओर धकेलना चाहिए। शकुनि अपनी कूटनीति और धूर्तता को सही ठहराने का प्रयास करता है, लेकिन गांधारी उसे स्पष्ट रूप से बताती है कि उसके कार्य दुर्योधन के लिए हानिकारक हैं। अंत में, गांधारी उसे आदेश देती है कि वह अपने विनाशकारी मार्ग से दुर्योधन को न भटकाए, अन्यथा उसे हस्तिनापुर से निष्कासित किया जाएगा। इस संवाद के माध्यम से लेखक ने दुर्योधन की स्थिति, शकुनि की कूटनीति और गांधारी की मातृस्नेह की गहराई को उजागर किया है। यह कहानी न केवल पारिवारिक संबंधों की जटिलता को दर्शाती है, बल्कि नैतिकता, धर्म, और सत्ता की भूख के बीच संघर्ष को भी बयां करती है।
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