दो शब्द :

यह पाठ "महाभारत" के "सांति पर्व" का एक विशेष खंड है, जिसे पहली बार समालोचनात्मक संपादित किया गया है। इस खंड में आपदधर्म और संधि के विषयों पर प्रकाश डाला गया है। इस ग्रंथ का संपादन श्रीपाद कृष्ण बेलवलकर ने किया है, जो भारतीय संस्कृति और साहित्य के विद्वान हैं। पुस्तक में विभिन्न विद्वानों और संस्थाओं का योगदान है, जिनमें आंध्र के रजा, लंदन की ब्रिटिश अकादमी, और कई भारतीय विश्वविद्यालय शामिल हैं। यह पुस्तक चार खंडों में प्रकाशित की गई है, और वर्तमान खंड 14 में आपदधर्म और संधि का विवरण दिया गया है। पुस्तक में पाठ, संपादकीय टिप्पणियाँ, और क्रिटिकल नोट्स शामिल हैं, जो पाठ की गहनता और विविधता को दर्शाते हैं। इसमें प्राचीन ग्रंथों के मॉडल से चित्रण भी किया गया है, जो भारतीय पांडित्य और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करता है। इस खंड का मुख्य उद्देश्य महाभारत की आपदधर्म संबंधी शिक्षाओं और संधि के नियमों को समझाना है, जो आज के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हैं। पाठ में विभिन्न शास्त्रीय और साहित्यिक संदर्भों का योगदान इसे और भी मूल्यवान बनाता है।


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